8 साल पहले वर्ष 2012 में अपनी साढ़े 3 साल की बेटी को एक आश्रम में छोड़कर गई मां की ममता आखिर जाग उठी। वह सोमवार को शहर के चौहाबो थाना इलाके के सेक्टर 16 स्थित लवकुश आश्रम पहुंची और बेटी को घर ले जाने की मांग करने लगी। बोली- मैं उसकी मां हूं और मेरा ही उस पर हक बनता है। इस पर आश्रम के प्रभारी राजेंद्र परिहार ने कहा कि बेटी देने से इनकार नहीं, बस आप चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) से बेटी को घर ले जाने का ऑर्डर ले आएं।
इस दौरान सांगरिया फांटा रहने वाली बच्ची की मां और प्रभारी व स्टाफ के बीच माहौल गरम हो गया, लेकिन प्रभारी ने बगैर ऑर्डर बेटी को मां के सुपुर्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि मामला सीडब्ल्यूसी तक पहुंचा, उन्होंने बच्ची की काउंसलिंग की, जिसमें बच्ची ने मां के साथ जाने से इनकार कर दिया।
दूसरी बेटी की माैत हो गई तो इसे लेने पहुंची
बच्ची की मां ने बताया कि 2012 में उसने दूसरी शादी की थी। उस वक्त वह मजबूर थी, तब बच्ची साढ़े तीन साल की थी। ससुराल और पति के कहने से उसने उसे लवकुश आश्रम छोड़ दिया था। इधर, आश्रम नियमों में बंधा है। प्रभारी ने कहा कि वह इतने सालों में कभी बच्ची से मिलने नहीं पहुंची, अब ऐसे में अचानक कैसे ले जाना चाहती है? महिला ने बताया कि उसकी एक बेटी हौद में गिर गई थी, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
काउंसलिंग में बच्ची का इनकार : मामला जब सीडब्ल्यूसी के पास पहुंचा तो उन्होंने बच्ची की काउंसलिंग की। बयान लिए। बच्ची ने मां के साथ जाने से इनकार कर दिया। हालांकि अब मामले में सीडब्ल्यूसी एक और मीटिंग करेगी। इसके बाद ही निर्णय लेगी कि बच्ची आश्रम में रहेगी या फिर मां को सुपुर्द की जाएगी।