सादगी का संदेश देने सत्संग में की शादी, चवरी न फेरे, न ही बाराती

भोपालगढ़ के नाड़सर रोड स्थित एक मेरिज गार्डन में एक अनूठी शादी हुई। इसमें न तो चवरी और न ही फेरे करवाए गए। कोई बाराती भी नहीं था। बस यहां चल रही सत्संग में शादी संपन्न हो गई। वह भी महज आधा घंटे के अंदर ही। कबीर पंथी संत रामपाल महाराज के अनुयायी खांगटा के रहने वाले गंगाराम ने अपने पुत्र हीरादास की शादी रतकुड़िया के भीखाराम की पुत्री गुड्डी के साथ की। इसमें किसी तरह का दहेज नहीं लिया गया। सत्संग के दौरान मौजूद हजारों श्रद्धालु इसके गवाह बने। 


गरीबदास महाराज की वाणी से बिना किसी रस्म रिवाज में शादी रचाकर समाज को संदेश दिया। इस दौरान कोई भोज भी नहीं रखा गया। मेहमानों को चाय बिस्किट दिए गए। कार्यक्रम में मौजूद पूर्व राज्य मंत्री कमसा मेघवाल ने कहा कि दहेज के खिलाफ वर वधु की 17 मिनट में शादी ने विवाह पर हो रहे लाखों खर्च करने वाले सभी लोगों को एक संदेश दिया है। दहेज व अन्य चीजों पर फिजूलखर्ची की बजाय रुपए बेटी की पढ़ाई पर खर्च करने चाहिए। सभी ग्रामीणों ने नवदंपती को आशीर्वाद दिया और दहेज मुक्त शादी की सराहना की।